Friday, April 19, 2024
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रामचरितमानस: जब रावण के दूतों ने पकड़े जाने पर वानरों को दिलाई भगवान राम की सौगंध

रामचरितमानस: हनुमानजी लंका से लौटकर आ चुके थे. इसके बाद जाम्बवान् ने कहा- हे रघुनाथजी! सुनिए. हे नाथ! जिस पर आप दया करते हैं, उसे सदा कल्याण और निरंतर कुशल है. देवता, मनुष्य और मुनि सभी उस पर प्रसन्न रहते हैं. वही विजयी है, वही विनयी है और वही गुणों का समुद्र बन जाता है.

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